बामा अकादमी ऑफ फाइन ऑर्ट्स से
अपनी कला-यात्रा शुरू करके अपनी एक विशिष्ट पहचान बना चुकीं पूनम अरोड़ा ने
पिछले दिनों चंडीगढ़ स्थित गवर्नमेंट म्यूजियम एण्ड ऑर्ट गैलरी में
'सेलिब्रेशन ऑफ लाइफ' शीर्षक से अपनी पेंटिंग्स की एकल प्रदर्शनी आयोजित की । तीन से छह अप्रैल के बीच आयोजित हुई यह प्रदर्शनी उनकी पहली एकल प्रदर्शनी थी, जिसका उद्घाटन हरियाणा पुलिस हाउसिंग कॉर्पोरेशन के प्रबंध निदेशक और डीजीपी बीएस संधु ने किया ।
पूनम अरोड़ा की यह पहली एकल प्रदर्शनी जरूर थी, लेकिन पिछले करीब एक दशक से
वह चूँकि समूह प्रदर्शनियों में अपनी पेंटिंग्स लगातार प्रदर्शित करती रही
हैं, इसलिए कला प्रेक्षकों और कला प्रेमियों के बीच उनकी सृजनात्मक
क्षमताओं का गहरा परिचय पहले से था । उल्लेखनीय है कि पूनम अरोड़ा वर्ष
2005 से चंडीगढ़ और पंचकुला की विभिन्न ऑर्ट गैलरियों में तथा अन्य आयोजनों
में अपनी पेंटिंग्स प्रदर्शित कर रही हैं और इन वर्षों में शायद ही कोई
ऐसा वर्ष रहा हो जबकि उनकी पेंटिंग्स कहीं न कहीं प्रदर्शित न हुई हों - अधिकतर वर्षों में तो दो और तीन बार भी उनकी कलाकृतियाँ अलग-अलग मौकों पर देखी गईं हैं ।
पूनम अरोड़ा का कहना है कि पेंटिंग के प्रति उनका लगाव यूँ तो बचपन से ही रहा है - लेकिन अपने इस लगाव को व्यवहार में सचमुच संभव बनाने का अवसर उन्हें वर्ष 2005 में तब मिला, जब वह बामा अकादमी ऑफ फाइन ऑर्ट्स के संपर्क में आईं ।
1972 में जन्मीं पूनम अरोड़ा ने दिल्ली विश्वविद्यालय से बीएससी, हिमाचल
विश्वविद्यालय से एमए और अन्नामलाई विश्वविद्यालय से बीएड किया - लेकिन
बचपन का उनका लगाव बामा अकादमी ऑफ फाइन ऑर्ट्स में आकर पूरा हुआ ।
पूनम
अरोड़ा के साथ चंडीगढ़/पंचकुला में जिन अन्य कलाकारों की सक्रियता है, उनमें
अधिकतर का काम जहाँ शौकिया और सजावटी किस्म का लगता है, वहाँ पूनम अरोड़ा ने नवीन प्रयोगों के साथ विमर्श - खासतौर पर स्त्री विमर्श और उसे वृहत्तर बनाते हुए सामाजिक सरोकारों को व्यक्त करते 'दृश्य' रचे और इस तरह समकालीन कला के परिदृश्य में अपनी जगह बनाने का प्रयास किया ।
पूनम की पेंटिंग्स अपने विषय को लेकर पहली नजर में तो क्लिष्ट लगती हैं और
विशुद्ध रूप से वैयक्तिक और निजत्व को सामने रखती हुई प्रतीत होती हैं,
किंतु उसकी संरचनाओं के भीतर प्रवेश करने पर वह बड़े मसलों से मुठभेड़ करती
हुईं सी महसूस होती हैं । पूनम अरोड़ा ने अपनी पेंटिंग्स में
विचारोत्तेजक विमर्श को जो स्वर दिया है, उसके चलते ही अपने समकालीनों से
अलग उन्हें एक विशिष्ट पहचान मिली है ।
पूनम अरोड़ा की पहली एकल प्रदर्शनी के उद्घाटन अवसर के कुछेक दृश्यों को तथा उस अवसर की मीडिया में हुई चर्चा को यहाँ इन तस्वीरों में 'देखा' जा सकता है :












