बामा अकादमी के निदेशक द्धय राम कुमार शर्मा और भारती शर्मा ने लखनऊ में कला एवं शिल्प महाविद्यालय की भव्य तथा ऐतिहासिक इमारत के दर्शन तो किए ही, साथ ही महाविद्यालय के उपप्रधानाचार्य राजेंद्र प्रसाद से मुलाकात और कई विषयों पर गहन बातचीत भी की ।
राजेंद्र प्रसाद से उनकी मुलाकात संयोगवश ही हुई । रविवार का दिन होने के
बावजूद राजेंद्र प्रसाद अपने कार्यालय में परीक्षा संबंधी कामकाज निपटाने
के उद्देश्य से उपस्थित थे । इससे भी ज्यादा दिलचस्प संयोग यह था - जैसा
कि स्वयं राजेंद्र प्रसाद ने बताया - कि उन्हें एक दिन पहले चंडीगढ़ ऑर्ट
कॉलिज में परीक्षा संबंधी काम के लिए निकलना था, लेकिन टिकट कंफर्म न हो
पाने के कारण वह नहीं जा सके । राजेंद्र प्रसाद ने मजाक में कहा भी कि मेरी किस्मत में आज चंडीगढ़ के लोगों से मिलना लिखा ही था, मैं नहीं जा पाया तो आप यहाँ आ गए ।
राम
कुमार शर्मा और भारती शर्मा की राजेंद्र प्रसाद के साथ कई विषयों पर गंभीर
चर्चा हुई । उन्होंने अपने अपने पुराने दिनों के अनुभवों को तथा वरिष्ठ
कलाकारों के साथ के अपने अपने बीते अनुभवों को एक-दूसरे के साथ बाँटा । चंडीगढ़
की कला गतिविधियों तथा चंडीगढ़ में कला अध्ययन की स्थितियों पर भी उनके बीच
चर्चा हुई - जिससे जाहिर हुआ कि राजेंद्र प्रसाद का चंडीगढ़ के कला शिक्षा
के केंद्रों से अच्छा परिचय है । राजेंद्र प्रसाद ने लखनऊ के कला परिदृश्य का तथा महाविद्यालय में बीएफए व एमएफए में दाखिले की स्थितियों तथा प्रक्रिया का संक्षिप्त परिचय दिया ।
लखनऊ के कला एवं शिल्प महाविद्यालय का वाश पेंटिंग के साथ गहरा नाता रहा है । राजेंद्र प्रसाद स्वयं वाश पेंटिंग के एक प्रतिष्ठित कलाकार हैं । राम कुमार शर्मा और भारती शर्मा को राजेंद्र प्रसाद के कार्यालय में उनकी कुछेक पेंटिंग देखने का अवसर भी मिला । पेंटिंग देखते हुए उनके बीच वाश माध्यम को लेकर तथा एक दूसरे की रचना-यात्रा को लेकर परिचयात्मक बातचीत भी हुई ।
लखनऊ
के कला एवं शिल्प महाविद्यालय में राम कुमार शर्मा तथा भारती शर्मा द्धारा
बिताये गए समय के कुछेक क्षणों को यहाँ इन तस्वीरों में देखा जा सकता है :
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