Sunday, August 31, 2014

अकादमी की आगे की गतिविधियाँ अब नए परिसर में

एक सितंबर से बामा अकादमी की गतिविधियाँ नए परिसर में होंगी । इस बाबत सारी तैयारी कर ली गई हैं । अकादमी के नए परिसर को पूरी तरह से तैयार कर लिया गया है । अकादमी के प्रवर्तक-निदेशक द्धय रामकुमार शर्मा और भारती शर्मा के दिशा-निर्देशन में गतिविधियाँ शुरू किए जाने से पहले की सारी तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया गया है । छोटी से छोटी जरूरतों और सुविधाओं का ध्यान रखते हुए हर वह काम कर लिया गया है जो उनके ध्यान में आया और या जिसका उन्हें ध्यान करवाया गया ।
अकादमी के नए परिसर को लेकर अकादमी के छात्रों तथा अकादमी से जुड़े कलाकारों में भी गहरी उत्सुकता और जिज्ञासा देखी गई है । इसी उत्सुकता और जिज्ञासा के चलते कल 30 और आज 31 अगस्त को कई छात्रों व कलाकारों ने अकादमी के नए परिसर का जायेजा लिया । इन दो दिनों में जो लोग भी यहाँ आए वह तैयारियों को देख कर खासे प्रभावित भी हुए और खुश भी । उन्होंने भी माना और कहा भी कि अकादमी का नया परिसर कामकाज के लिहाज से उनके लिए ज्यादा फ्रेंडली लग रहा है ।
अकादमी में कामकाज विधिवत रूप से शुरू होने से एकदम पहले की तैयारियों तथा स्थितियों का जायेजा यहाँ प्रस्तुत तस्वीरों में भी लिया जा सकता है :









Thursday, August 21, 2014

अकादमी का नया परिसर लगभग तैयार

परंपरागत तरीके से बामा अकादमी के नए परिसर में औपचारिक रूप से प्रवेश करने का आयोजन संपन्न कर लिया गया है, और अब जल्दी ही अकादमी के नये परिसर में गतिविधियाँ शुरू हो जायेंगी । अकादमी के प्रवर्तक-निदेशक द्धय रामकुमार शर्मा और भारती शर्मा ने विधिवत तरीके से प्रवेश के शुभ अवसर पर रीति-रिवाज के अनुसार होने वाली पूजापाठ को संपन्न किया और अकादमी के छात्रों व कलाकारों के उज्ज्वल भविष्य के लिए प्रार्थना की और ईश्वर तथा अपने गुरु जी को पूर्ण श्रृद्धा के साथ याद करते हुए उनका आशीर्वाद लिया ।
अकादमी का नया परिसर पिछले परिसर की तुलना में बड़ा है - जिसका फायदा उठाते हुए छात्रों व कलाकारों के काम को यहाँ ऐसे एंगल पर स्थापित किया गया है, जिससे कि वह आगंतुकों को सहजता और स्पष्टता के साथ नजर आ सकें; तथा आगंतुकों को अकादमी के छात्रों व कलाकारों द्धारा किए गए काम से नजदीक से परिचित हो सकने का मौका मिल सके । अकादमी के नए परिसर को इस तरह डिजाइन और व्यवस्थित किया गया है जिससे कि छात्रों तथा यहाँ काम करने वाले कलाकारों को काम करने के लिए पर्याप्त स्पेस मिले । नए परिसर की बनावट भी ऐसी है कि प्राकृतिक रोशनी का भी पूरा-पूरा लाभ लिया जा सकता है ।
अकादमी के नए परिसर में बुनियादी काम लगभग पूरे हो चुके हैं और अब बस फाइनल टचेज देना ही बाकी रह गया है । जल्दी ही उसे भी पूरा कर लिए जाने का विश्वास है और उम्मीद है कि नया महीना अकादमी के नए परिसर में ही शुरू होगा । नया परिसर जितना अभी तैयार हुआ है, उसकी एक झलक यहाँ प्रस्तुत तस्वीरों में देखी जा सकती है :






Thursday, July 31, 2014

अकादमी नए परिसर में जाने की तैयारी में

बामा अकादमी जल्दी ही एक नए परिसर में शिफ्ट हो जाएगी । अकादमी का मौजूदा परिसर छात्रों, कलाकारों और आगंतुकों की बढ़ती संख्या तथा उसी हिसाब से बढ़ती जरूरतों को पूरा कर पाने के संदर्भ में छोटा पड़ रहा था और पिछले काफी समय से जगह की तंगी महसूस की जा रही थी ।  
अकादमी प्रबंधन के अनुसार, जगह की बढ़ती तंगी को देखते/पहचानते हुए अकादमी के लिए एक नए परिसर की तलाश की जा रही थी - जो अब पूरी हो गई है । छात्रों, कलाकारों और आगंतुकों की जरूरतों को देखते/समझते हुए नए परिसर में कई एक नई व्यवस्थाएँ की जा रही हैं, जिन्हें उपलब्ध करवा पाना चाहते हुए भी अभी तक संभव नहीं हो पा रहा था । अकादमी के नए परिसर की साज-सज्जा को अकादमी के प्रवर्तक-निदेशक राम कुमार शर्मा की देख-रेख में ही पूरा किया जा रहा है ।  
राम कुमार शर्मा का सारा ध्यान इस बात पर है कि अकादमी का नया परिसर छात्रों, कलाकारों तथा आगंतुकों के लिए ज्यादा से ज्यादा फ्रेंडली हो; और अकादमी के छात्रों व कलाकारों को काम करने के लिए उत्साहित करने वाला माहौल और स्पेस मिले । इसके लिए ही अकादमी के नए परिसर की डिजाइनिंग पर खास ध्यान दिया जा रहा है ।
अकादमी का नया परिसर मौजूदा परिसर से ज्यादा दूर भी नहीं है, जिस कारण अकादमी के छात्रों व कलाकारों के लिए वहाँ पहुँचने में कोई समस्या भी नहीं होगी । अकादमी के नए परिसर के नजदीक चूँकि पार्किंग के लिए पर्याप्त जगह है इसलिए यहाँ आने/पहुँचने में बल्कि ज्यादा सुविधा ही होगी ।  
अकादमी प्रबंधन के अनुसार, नए परिसर में छात्रों व कलाकारों की जरूरतों के अनुरूप हर तरह की सुविधा उपलब्ध होगी - जिससे की छात्रों व कलाकारों को अपनी सृजनात्मकता को व्यापकता और नया आयाम देने का अवसर मिलेगा; तथा वह कला जगत में अपनी उपस्थिति को और ज्यादा प्रभावी बना सकेंगे ।
अकादमी के नए परिसर के 'बनने' की तैयारियों का एक जायेजा यहाँ प्रस्तुत इन तस्वीरों में भी लिया जा सकता है :







  

Thursday, June 5, 2014

लखनऊ के कला एवं शिल्प महाविद्यालय में

बामा अकादमी के निदेशक द्धय राम कुमार शर्मा और भारती शर्मा ने लखनऊ में कला एवं शिल्प महाविद्यालय की भव्य तथा ऐतिहासिक इमारत के दर्शन तो किए ही, साथ ही महाविद्यालय के उपप्रधानाचार्य राजेंद्र प्रसाद से मुलाकात और कई विषयों पर गहन बातचीत भी की । राजेंद्र प्रसाद से उनकी मुलाकात संयोगवश ही हुई । रविवार का दिन होने के बावजूद राजेंद्र प्रसाद अपने कार्यालय में परीक्षा संबंधी कामकाज निपटाने के उद्देश्य से उपस्थित थे । इससे भी ज्यादा दिलचस्प संयोग यह था - जैसा कि स्वयं राजेंद्र प्रसाद ने बताया - कि उन्हें एक दिन पहले चंडीगढ़ ऑर्ट कॉलिज में परीक्षा संबंधी काम के लिए निकलना था, लेकिन टिकट कंफर्म न हो पाने के कारण वह नहीं जा सके । राजेंद्र प्रसाद ने मजाक में कहा भी कि मेरी किस्मत में आज चंडीगढ़ के लोगों से मिलना लिखा ही था, मैं नहीं जा पाया तो आप यहाँ आ गए ।
राम कुमार शर्मा और भारती शर्मा की राजेंद्र प्रसाद के साथ कई विषयों पर गंभीर चर्चा हुई । उन्होंने अपने अपने पुराने दिनों के अनुभवों को तथा वरिष्ठ कलाकारों के साथ के अपने अपने बीते अनुभवों को एक-दूसरे के साथ बाँटा । चंडीगढ़ की कला गतिविधियों तथा चंडीगढ़ में कला अध्ययन की स्थितियों पर भी उनके बीच चर्चा हुई - जिससे जाहिर हुआ कि राजेंद्र प्रसाद का चंडीगढ़ के कला शिक्षा के केंद्रों से अच्छा परिचय है । राजेंद्र प्रसाद ने लखनऊ के कला परिदृश्य का तथा महाविद्यालय में बीएफए व एमएफए में दाखिले की स्थितियों तथा प्रक्रिया का संक्षिप्त परिचय दिया ।
लखनऊ के कला एवं शिल्प महाविद्यालय का वाश पेंटिंग के साथ गहरा नाता रहा है । राजेंद्र प्रसाद स्वयं वाश पेंटिंग के एक प्रतिष्ठित कलाकार हैं । राम कुमार शर्मा और भारती शर्मा को राजेंद्र प्रसाद के कार्यालय में उनकी कुछेक पेंटिंग देखने का अवसर भी मिला । पेंटिंग देखते हुए उनके बीच वाश माध्यम को लेकर तथा एक दूसरे की रचना-यात्रा को लेकर परिचयात्मक बातचीत भी हुई ।
लखनऊ के कला एवं शिल्प महाविद्यालय में राम कुमार शर्मा तथा भारती शर्मा द्धारा बिताये गए समय के कुछेक क्षणों को यहाँ इन तस्वीरों में देखा जा सकता है :








Wednesday, June 4, 2014

लखनऊ स्थित ललित कला अकादमी क्षेत्रीय केंद्र में

बामा अकादमी के निदेशक द्धय राम कुमार शर्मा और भारती शर्मा ने लखनऊ स्थित ललित कला अकादमी के क्षेत्रीय केंद्र का अभी हाल ही में भ्रमण किया । यहाँ उन्होंने घूम-घूम कर केंद्र की इमारत का, इमारत के स्थापत्य का और बाहर लगे मूर्तिशिल्पों का खासी उत्सुकता और दिलचस्पी के साथ जायजा लिया । केंद्र की कला दीर्घा में बनारस की युवा कलाकार रीना सिंह की पेंटिंग्स की एकल प्रदर्शनी देखने का तथा रीना सिंह से बातचीत करने का मौका भी उन्हें मिला । उनके बीच बनारस और चंडीगढ़ के कला परिदृश्य को लेकर संक्षिप्त चर्चा भी हुई तथा इस संदर्भ की महत्वपूर्ण सूचनाओं का आदान-प्रदान भी हुआ । ललित कला अकादमी के लखनऊ स्थित क्षेत्रीय केंद्र में राम कुमार शर्मा और भारती शर्मा की सक्रियता के कुछेक अवसरों को यहाँ इन तस्वीरों में देखा जा सकता है : 
 






 

Saturday, May 24, 2014

आशीष भटनागर के वाटर कलर

आशीष भटनागर ने हाल ही में वाटर कलर में कुछ अभिनव प्रयोग किए हैं । रंगों को जिस लयात्मकता और कल्पनाशीलता और दक्षता के साथ उन्होंने इस्तेमाल किया है, उसके चलते वाटर कलर में किया गया उनका यह काम सहज ही आकर्षित करता है । उनके इस काम में अभिव्यक्त हुआ रंग-संयोजन वास्तव में सम्मोहित करता है । आप भी देखिये :  




Saturday, April 19, 2014

अपनी पेंटिंग्स में विचारोत्तेजक विमर्श को स्वर देने के चलते ही पूनम अरोड़ा को अपने समकालीनों से अलग एक विशिष्ट पहचान मिली है

बामा अकादमी ऑफ फाइन ऑर्ट्स से अपनी कला-यात्रा शुरू करके अपनी एक विशिष्ट पहचान बना चुकीं पूनम अरोड़ा ने पिछले दिनों चंडीगढ़ स्थित गवर्नमेंट म्यूजियम एण्ड ऑर्ट गैलरी में 'सेलिब्रेशन ऑफ लाइफ' शीर्षक से अपनी पेंटिंग्स की एकल प्रदर्शनी आयोजित की । तीन से छह अप्रैल के बीच आयोजित हुई यह प्रदर्शनी उनकी पहली एकल प्रदर्शनी थी, जिसका उद्घाटन हरियाणा पुलिस हाउसिंग कॉर्पोरेशन के प्रबंध निदेशक और डीजीपी बीएस संधु ने किया । पूनम अरोड़ा की यह पहली एकल प्रदर्शनी जरूर थी, लेकिन पिछले करीब एक दशक से वह चूँकि समूह प्रदर्शनियों में अपनी पेंटिंग्स लगातार प्रदर्शित करती रही हैं, इसलिए कला प्रेक्षकों और कला प्रेमियों के बीच उनकी सृजनात्मक क्षमताओं का गहरा परिचय पहले से था । उल्लेखनीय है कि पूनम अरोड़ा वर्ष 2005 से चंडीगढ़ और पंचकुला की विभिन्न ऑर्ट गैलरियों में तथा अन्य आयोजनों में अपनी पेंटिंग्स प्रदर्शित कर रही हैं और इन वर्षों में शायद ही कोई ऐसा वर्ष रहा हो जबकि उनकी पेंटिंग्स कहीं न कहीं प्रदर्शित न हुई हों - अधिकतर वर्षों में तो दो और तीन बार भी उनकी कलाकृतियाँ अलग-अलग मौकों पर देखी गईं हैं ।
पूनम अरोड़ा का कहना है कि पेंटिंग के प्रति उनका लगाव यूँ तो बचपन से ही रहा है - लेकिन अपने इस लगाव को व्यवहार में सचमुच संभव बनाने का अवसर उन्हें वर्ष 2005 में तब मिला, जब वह बामा अकादमी ऑफ फाइन ऑर्ट्स के संपर्क में आईं । 1972 में जन्मीं पूनम अरोड़ा ने दिल्ली विश्वविद्यालय से बीएससी, हिमाचल विश्वविद्यालय से एमए और अन्नामलाई विश्वविद्यालय से बीएड किया - लेकिन बचपन का उनका लगाव बामा अकादमी ऑफ फाइन ऑर्ट्स में आकर पूरा हुआ ।
पूनम अरोड़ा के साथ चंडीगढ़/पंचकुला में जिन अन्य कलाकारों की सक्रियता है, उनमें अधिकतर का काम जहाँ शौकिया और सजावटी किस्म का लगता है, वहाँ पूनम अरोड़ा ने नवीन प्रयोगों के साथ विमर्श - खासतौर पर स्त्री विमर्श और उसे वृहत्तर बनाते हुए सामाजिक सरोकारों को व्यक्त करते 'दृश्य' रचे और इस तरह समकालीन कला के परिदृश्य में अपनी जगह बनाने का प्रयास किया । पूनम की पेंटिंग्स अपने विषय को लेकर पहली नजर में तो क्लिष्ट लगती हैं और विशुद्ध रूप से वैयक्तिक और निजत्व को सामने रखती हुई प्रतीत होती हैं, किंतु उसकी संरचनाओं के भीतर प्रवेश करने पर वह बड़े मसलों से मुठभेड़ करती हुईं सी महसूस होती हैं । पूनम अरोड़ा ने अपनी पेंटिंग्स में विचारोत्तेजक विमर्श को जो स्वर दिया है, उसके चलते ही अपने समकालीनों से अलग उन्हें एक विशिष्ट पहचान मिली है ।
पूनम अरोड़ा की पहली एकल प्रदर्शनी के उद्घाटन अवसर के कुछेक दृश्यों को तथा उस अवसर की मीडिया में हुई चर्चा को यहाँ इन तस्वीरों में 'देखा' जा सकता है :