Wednesday, June 4, 2014

लखनऊ स्थित ललित कला अकादमी क्षेत्रीय केंद्र में

बामा अकादमी के निदेशक द्धय राम कुमार शर्मा और भारती शर्मा ने लखनऊ स्थित ललित कला अकादमी के क्षेत्रीय केंद्र का अभी हाल ही में भ्रमण किया । यहाँ उन्होंने घूम-घूम कर केंद्र की इमारत का, इमारत के स्थापत्य का और बाहर लगे मूर्तिशिल्पों का खासी उत्सुकता और दिलचस्पी के साथ जायजा लिया । केंद्र की कला दीर्घा में बनारस की युवा कलाकार रीना सिंह की पेंटिंग्स की एकल प्रदर्शनी देखने का तथा रीना सिंह से बातचीत करने का मौका भी उन्हें मिला । उनके बीच बनारस और चंडीगढ़ के कला परिदृश्य को लेकर संक्षिप्त चर्चा भी हुई तथा इस संदर्भ की महत्वपूर्ण सूचनाओं का आदान-प्रदान भी हुआ । ललित कला अकादमी के लखनऊ स्थित क्षेत्रीय केंद्र में राम कुमार शर्मा और भारती शर्मा की सक्रियता के कुछेक अवसरों को यहाँ इन तस्वीरों में देखा जा सकता है : 
 






 

Saturday, May 24, 2014

आशीष भटनागर के वाटर कलर

आशीष भटनागर ने हाल ही में वाटर कलर में कुछ अभिनव प्रयोग किए हैं । रंगों को जिस लयात्मकता और कल्पनाशीलता और दक्षता के साथ उन्होंने इस्तेमाल किया है, उसके चलते वाटर कलर में किया गया उनका यह काम सहज ही आकर्षित करता है । उनके इस काम में अभिव्यक्त हुआ रंग-संयोजन वास्तव में सम्मोहित करता है । आप भी देखिये :  




Saturday, April 19, 2014

अपनी पेंटिंग्स में विचारोत्तेजक विमर्श को स्वर देने के चलते ही पूनम अरोड़ा को अपने समकालीनों से अलग एक विशिष्ट पहचान मिली है

बामा अकादमी ऑफ फाइन ऑर्ट्स से अपनी कला-यात्रा शुरू करके अपनी एक विशिष्ट पहचान बना चुकीं पूनम अरोड़ा ने पिछले दिनों चंडीगढ़ स्थित गवर्नमेंट म्यूजियम एण्ड ऑर्ट गैलरी में 'सेलिब्रेशन ऑफ लाइफ' शीर्षक से अपनी पेंटिंग्स की एकल प्रदर्शनी आयोजित की । तीन से छह अप्रैल के बीच आयोजित हुई यह प्रदर्शनी उनकी पहली एकल प्रदर्शनी थी, जिसका उद्घाटन हरियाणा पुलिस हाउसिंग कॉर्पोरेशन के प्रबंध निदेशक और डीजीपी बीएस संधु ने किया । पूनम अरोड़ा की यह पहली एकल प्रदर्शनी जरूर थी, लेकिन पिछले करीब एक दशक से वह चूँकि समूह प्रदर्शनियों में अपनी पेंटिंग्स लगातार प्रदर्शित करती रही हैं, इसलिए कला प्रेक्षकों और कला प्रेमियों के बीच उनकी सृजनात्मक क्षमताओं का गहरा परिचय पहले से था । उल्लेखनीय है कि पूनम अरोड़ा वर्ष 2005 से चंडीगढ़ और पंचकुला की विभिन्न ऑर्ट गैलरियों में तथा अन्य आयोजनों में अपनी पेंटिंग्स प्रदर्शित कर रही हैं और इन वर्षों में शायद ही कोई ऐसा वर्ष रहा हो जबकि उनकी पेंटिंग्स कहीं न कहीं प्रदर्शित न हुई हों - अधिकतर वर्षों में तो दो और तीन बार भी उनकी कलाकृतियाँ अलग-अलग मौकों पर देखी गईं हैं ।
पूनम अरोड़ा का कहना है कि पेंटिंग के प्रति उनका लगाव यूँ तो बचपन से ही रहा है - लेकिन अपने इस लगाव को व्यवहार में सचमुच संभव बनाने का अवसर उन्हें वर्ष 2005 में तब मिला, जब वह बामा अकादमी ऑफ फाइन ऑर्ट्स के संपर्क में आईं । 1972 में जन्मीं पूनम अरोड़ा ने दिल्ली विश्वविद्यालय से बीएससी, हिमाचल विश्वविद्यालय से एमए और अन्नामलाई विश्वविद्यालय से बीएड किया - लेकिन बचपन का उनका लगाव बामा अकादमी ऑफ फाइन ऑर्ट्स में आकर पूरा हुआ ।
पूनम अरोड़ा के साथ चंडीगढ़/पंचकुला में जिन अन्य कलाकारों की सक्रियता है, उनमें अधिकतर का काम जहाँ शौकिया और सजावटी किस्म का लगता है, वहाँ पूनम अरोड़ा ने नवीन प्रयोगों के साथ विमर्श - खासतौर पर स्त्री विमर्श और उसे वृहत्तर बनाते हुए सामाजिक सरोकारों को व्यक्त करते 'दृश्य' रचे और इस तरह समकालीन कला के परिदृश्य में अपनी जगह बनाने का प्रयास किया । पूनम की पेंटिंग्स अपने विषय को लेकर पहली नजर में तो क्लिष्ट लगती हैं और विशुद्ध रूप से वैयक्तिक और निजत्व को सामने रखती हुई प्रतीत होती हैं, किंतु उसकी संरचनाओं के भीतर प्रवेश करने पर वह बड़े मसलों से मुठभेड़ करती हुईं सी महसूस होती हैं । पूनम अरोड़ा ने अपनी पेंटिंग्स में विचारोत्तेजक विमर्श को जो स्वर दिया है, उसके चलते ही अपने समकालीनों से अलग उन्हें एक विशिष्ट पहचान मिली है ।
पूनम अरोड़ा की पहली एकल प्रदर्शनी के उद्घाटन अवसर के कुछेक दृश्यों को तथा उस अवसर की मीडिया में हुई चर्चा को यहाँ इन तस्वीरों में 'देखा' जा सकता है :  
 






 
             

Monday, January 6, 2014

दलजीत कौर का रंगों को इस्तेमाल करने का हुनर लगातार समृद्ध हुआ है

दलजीत कौर की बामा अकादमी ऑफ फाइन ऑर्ट्स की हाल ही में आयोजित हुई पंद्रहवीं वार्षिक प्रदर्शनी में प्रदर्शित पेंटिंग्स को तो कला प्रेक्षकों और सामान्य दर्शकों की सराहना मिली ही, उनकी अन्य दो पेंटिंग्स को भी खासा पसंद किया गया है । अलग-अलग समय में बनी/बनाई गईं उनकी पेंटिंग्स देखने से पता चलता है कि रंगों को इस्तेमाल करने का उनका हुनर लगातार समृद्ध हुआ है और साथ ही उनकी रचनात्मकता में भी श्रीवृद्धि हुई है । चंडीगढ़ स्थित पंजाब कला भवन की शोभा सिंह ऑर्ट गैलरी में 27 से 29 दिसंबर 2013 के बीच बामा अकादमी ऑफ फाइन ऑर्ट्स की वार्षिक प्रदर्शनी में प्रदर्शित उनकी पेंटिंग को तो लोगों ने देखा है किन्तु उनकी अन्य दो पेंटिंग्स को ज्यादा लोग अभी नहीं देख सके हैं । यहाँ उनकी उक्त दो पेंटिंग्स की तस्वीरें भी प्रदर्शित हैं और साथ ही बामा अकादमी की वार्षिक प्रदर्शनी में लगी उनकी पेंटिंग को देख रहीं उपिंदर कौर अहलुवालिया की तस्वीर भी है । पंचकुला के म्यूनिसिपल कार्पोरेशन की मेयर उपिंदर कौर अहलुवालिया ने उक्त प्रदर्शनी का उद्घाटन किया था । एक अन्य तस्वीर में दलजीत कौर अपनी 'हर शाइन' शीर्षक पेंटिंग के साथ दिख रही हैं |






Tuesday, October 1, 2013

राम कुमार शर्मा कोलकाता के 'पेंटर्स ओर्केस्ट्रा' ग्रुप के सक्रिय सदस्य स्वप्न कुमार साहा के साथ

राम कुमार शर्मा ने अभी हाल ही में नई दिल्ली स्थित इंडिया हैबिटेट सेंटर की कला गतिविधियों में जो साझीदारी की थी, उसके तहत वह वहाँ की प्रमुख ऑर्ट गैलरी - विजुअल ऑर्ट गैलरी - में आयोजित एक समूह प्रदर्शनी देखने पहुँचे थे । इस समूह प्रदर्शनी में देश के विभिन्न प्रदेशों के विशिष्ट व प्रतिभाशाली कलाकारों का काम प्रदर्शित था ।
इस समूह प्रदर्शनी में राम कुमार शर्मा को स्वप्न कुमार साहा की पेंटिंग्स ने खास तौर से आकर्षित और प्रभावित किया । इसके चलते स्वप्न कुमार साहा के साथ उनकी लंबी और दिलचस्प बातचीत हुई । इस बातचीत में एक तरफ राम कुमार शर्मा ने स्वप्न कुमार साहा के बारे में तथा उनकी सक्रियता और उपलब्धियों के बारे में जाना, तो दूसरी तरफ स्वप्न कुमार साहा ने राम कुमार शर्मा के बारे में और उनकी सक्रियता व उपलब्धियों के संबंध में जानकारी ली । बामा अकादमी के बारे में सुन/जान कर स्वप्न कुमार साहा की जिज्ञासा इतनी बढ़ी कि फिर उन्होंने बामा अकादमी के बारे में राम कुमार शर्मा से कई सवाल पूछे और बामा अकादमी की गतिविधियों को खुले मन से बार-बार सराहा ।
राम कुमार शर्मा यहाँ दिए गए चित्रों में स्वप्न कुमार साहा के साथ उनकी पेंटिंग्स देखते हुए और उनसे बातचीत करते हुए नजर आ रहे हैं । स्वप्न कुमार साहा कोलकाता के 'पेंटर्स ओर्केस्ट्रा' ग्रुप के सक्रिय सदस्य हैं |



Sunday, September 22, 2013

बामा अकादमी में स्वामी विवेकानंद के संदेशों पर चित्र रचना

बामा अकादमी ने स्वामी विवेकानंद की 150वीं जयंती के मौके पर होने वाले समारोहों में अपनी भी संलग्नता और भागीदारी दिखाई, और इसके तहत अकादमी में स्वामी विवेकानंद के संदेशों पर आधारित एक चित्रशाला का आयोजन किया गया । बच्चों, किशोरों और बड़े चित्रकारों ने इस चित्रशाला में भाग लिया और इस आयोजन के पहले चरण में स्वामी विवेकानंद के संदेशों पर आधारित चित्र बनाये । दिनभर चले इस आयोजन के दूसरे चरण में चित्रशाला में बने/बनाये गये चित्रों की प्रदर्शनी लगाई गई तथा चित्रशाला में भागीदारी निभाने वाले चित्रकारों को सम्मानित किया गया । यहाँ प्रस्तुत चित्रों में आयोजन के कुछेक दृश्यों को देखा जा सकता है :